इंटरनेट का पूरा नाम इंटरनेशनल नेटवर्क है जिसकी खोज 1950 ईस्वी में बीट कर्फ के द्वारा की गई बीट कर्फ को इंटरनेट का पिता भी कहा जाता है | इंटरनेट दो या दो से अधिक कंप्यूटरों को आपस में जोड़कर बनाया गया एक समूह होता है | इंटरनेट पर सभी डाटा को प्रोटोकॉल के द्वारा नियंत्रित किया जाता है |
History of Internet (इंटरनेट का इतिहास)
1969 ईस्वी में Los Angeles में University of California and University of Utah ARPANET (Advance Project Research Project Network) की खोज की | इसका मुख्य उद्देश्य था अमेरिकी विश्वविद्यालयों तथा मंत्रालय के कंप्यूटरों को आपस में जोड़ना यह दुनिया का पहला पैकेट स्विचिंग नेटवर्क था | कुछ समय बाद इसे नेशनल साइंस फाउंडेशन ने उच्च क्षमता वाला नेटवर्क बनाया जिसका नाम NSFnet रखा गया NSFnet सिर्फ शैक्षिक अनुसंधान की अनुमति देता था आगे चलकर ARPANET तथा NSFnet से मिलकर इंटरनेट बना |
Internet Connecting Protocol (इंटरनेट कनेक्टिंग प्रोटोकॉल)
प्रोटोकॉल नियमों का एक सेट होता है जो दो या दो से अधिक सिस्टम के बीच संचार को सही तरीके से व्यवस्थित वह नियंत्रित करता है | ताकि डाटा को सही रूप से आदान-प्रदान किया जा सके दुनिया का पहला प्रोटोकॉल TCP/IP को 1 जनवरी 1983 में ARPANET के द्वारा बनाया गया
Internet Protocol (इंटरनेट प्रोटोकॉल)
1.TCP (Transmission Control Protocol)
यह नेटवर्क पर विभिन्न उपकरणों के बीच संदेशों के आदान-प्रदान का काम करता है यह ट्रांसपोर्ट लेयर 4 पर काम करता है TCP एप्लीकेशन और नेटवर्क के बीच उपस्थित रहता है TCP कंप्यूटर के बीच डाटा को पैकेट के रूप में भेजता है |
2. IP (Internet Protocol)
इंटरनेट प्रोटोकॉल इसका प्रयोग विभिन्न कंप्यूटरों को नेटवर्क स्थापित करना तथा आपस में संचार प्रदान करने की अनुमति देता है | हर डिवाइस के लिए अलग-अलग आईपी एड्रेस होते हैं बिना आईपी एड्रेस के आप एक डिवाइस को दूसरी डिवाइस से कनेक्ट नहीं कर सकते हैं |
IP address Version (संस्करण)
इसके मुख्य रूप से दो संस्करण है
- IP V4
- IP V6
1. IP V4
ip v4 को 1983 ईस्वी में विकसित किया गया जो 32 बीट का होता है ipv4 के एड्रेस को चार भागों में विभाजित किया गया है 123.16.254.01 जो दशमलव के द्वारा अलग रहते हैं | जिसमें प्रत्येक की रेंज को 0 से लेकर 255 तक रखी गई है | प्रत्येक भाग 8 बीट के होते हैं तो इस हिसाब से 4 x 8 = 32 बीट हुआ ipv4 ऐड्रेस स्पेस में अधिकतम 4.2 बिलियन पते होते हैं इसे किसी भी रूप में लिखा जा सकता है|
IP V6
इसके अंतर्गत असीमित आईपी एड्रेस तैयार किये जा सकते हैं ipv6 128 बीट का होता है
Ipv6 मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं |
- प्राइवेट आईपी एड्रेस
- पब्लिक आईपी ऐड्रेस
ipv6 पता को कोलन से अलग करते हैं जो चार हेक्साडेसिमल अंकों से आठ समूह के रूप में होता है जैसे (3001:bd07:0000:8e32:0370:32a3:87b1:5252)
Ipv6 का प्रयोग डीएनएस रिकॉर्ड में भी किया जाता है
3. FTP (File Transfer Protocol)
इस प्रोटोकॉल के प्रयोग से अपनी कंप्यूटर या मोबाइल की फाइलों को इंटरनेट पर अपलोड करते हैं या इंटरनेट से किसी भी फाइल को अपने कंप्यूटर या मोबाइल में डाउनलोड करते हैं | साफ शब्दों में इस प्रोटोकॉल का प्रयोग हम फाइलों को आदान-प्रदान करने के लिए करते हैं FTP को 1971 ईस्वी में अभय भूषण द्वारा विकसित किया गया |
4. HTTP (Hyper Text Transfer Protocol)
यह इंटरनेट पर उपयोगकर्ताओं के लिए सूचनाओं का आदान-प्रदान करता है WWW में डाटा संचार का आधार होता है | इंटरनेट पर किसी भी फाइल या पेज पर पहुंचने के लिए अधिकांश वेबसाइट http का प्रयोग करती है अगर http में s लगा हो जैसे https तो उस वेबसाइट के पेज को सुरक्षित माना जाता है http का विकास 1989 में CERN में टीम बर्नर्स ली द्वारा की गई है |
5. HTML (Hypertext Markup Language)
इसका प्रयोग वेब पेज को डिजाइन बनाने में करते हैं लगभग सभी वेबसाइट के पेज एचटीएमएल में बने होते हैं यह एक प्रकार का मार्कअप भाषा है जो वेब पेज की संरचना व सामग्री को परिभाषित करता है html के संरचना में मुख्य रूप से दो भाग होते हैं
www (World Wide Web)
यह विशेष रूप से स्वरूपी डॉक्यूमेंट को समर्थन करने वाला इंटरनेट सर्वर की एक प्रणाली है | इसे वेब पेजों का नेटवर्क भी कहते हैं www की खोज 13 मार्च 1989 ईस्वी में की गई इसकी सबसे खास बात यह ऑडियो, वीडियो, ग्राफिक इत्यादि को सपोर्ट करता है www के पिता टी वार्निश ली को कहा जाता है डब्ल्यू डब्ल्यू को w3 भी कहते है |Web Page (वेब पेज):
कई कंप्यूटर डॉक्यूमेंट का संग्रह जो एचटीएमएल में लिखे होते हैं वेब पेज कहलाते हैं इन सभी पेजों को वेब ब्राउज़र द्वारा दिखाया जाता है वेब पेज मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं स्टैटिक यह बार-बार एक्सेस करने पर एक ही चीज को दिखाता है डायनेमिक यह बार-बार रिजल्ट को बदल देता है |
Website (वेबसाइट)
कई वेब पेजों का संग्रह जो एक दूसरे से हाइपरलिंक द्वारा जुड़े होते हैं वेबसाइट कहलाते हैं किसी भी वेबसाइट का पहला पेज होम पेज कहलाता है
Web Browser (वेब ब्राउज़र)
यह एक प्रकार का एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर होता है | जिसका प्रयोग न्यु कंटेंट को खोजने व खोलने में प्रयोग किया जाता है | यह मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं |
- टेक्स वेब ब्राउज़र जैसे (लाइनेक्स)
- ग्राफिकल वेब ब्राउज़र जैसे (क्रोम, नेटस्कैप, फायरफॉक्स, इंटरनेट एक्सप्लोरर इत्यादि)
Web Server (वेब Server)
यह एक सॉफ्टवेयर वह हार्डवेयर है जो ऑनलाइन की दुनिया में इंटरनेट पर वेबसाइटों और एप्लीकेशन को होस्ट करता है | तथा उपयोगकर्ताओं के जरूरत के अनुसार चीजों को उन तक पहुंचना है इसका मुख्य काम टैक्स इमेज वीडियो इत्यादि को सुरक्षित रखने तथा उसे उपयोगकर्ता के पास पहुंचना व उपयोगकर्ता के अनुरोध को स्वीकार करना होता है |
Web Address (वेब एड्रेस)
Domain Name System (डोमेन नेम सिस्टम)
कुछ डोमेन नेम के अंतिम भाग इस प्रकार हैं |
- .info (सूचना संगठन)
- .com (वाणिज्यक संगठन)
- .edu (शैक्षणिक संगठन)
- .net (नेटवर्क संसाधन)
- .org (गैर लाभकारी संगठन)
- .in (भरता)
- .an (आस्ट्रेलिया)
- .fr (फ्रांस)
- .nz (न्यूजीलैंड)
- .uk (यूनिटेट किंगडम)
Type of Computer Networks (कंप्यूटर नेटवर्क के प्रकार)
कंप्यूटर नेटवर्क मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं(i) LAN (Local Aria Network)
(ii) MAN (Metropolitan Aria Network)
(iii) WAN (Wide Aria Network)
(i) LAN (लैन)
इस प्रकार के नेटवर्क में कंप्यूटर एक सीमित क्षेत्र में उपस्थित रहते हैं | जैसे कोई बड़ी बिल्डिंग या उनका समूह किसी स्कूल या कैंपस में मतलब इसका क्षेत्र 1 किलोमीटर के अंदर रहना चाहिए इसको आपस में किसी संचार केवल द्वारा जोड़ा जाता है | जो लोकल एरिया नेटवर्क कहलाता है |
(ii) MAN(मैन)
जब एक साथ एक से अधिक LAN आपस में जुड़ते हैं तो वह MAN का निर्माण करते हैं | लेकिन उनकी दूरी किसी नगर या शहर के अंदर होनी चाहिए इस नेटवर्क में फाइबर ऑप्टिकल केबल का प्रयोग किया जाता है | यह नेटवर्क LAN की अपेक्षा महंगे होते हैं|
(iii) WAN (वैन)
यह नेटवर्क कई महाद्वीपों तक फैला होता है इनका क्षेत्र हजारों किलोमीटर तक होता है ज्यादा दूरी होने की वजह से इसमें माइक्रोवेव स्टेशन का प्रयोग किया जाता है जैसे एक देश से दूसरे देश तक यह भी फैले होते हैं |
यहां पर मैंने कुछ अन्य कंप्यूटर नेटवर्क को भी लिया है |- PAN personal Area Network)
- VAN (Vertual Area Network)
PAN personal Area Network)
इसकी दूरी बहुत ही कम होती है जो एक या दो व्यक्तियों के बीच तक सीमित रहती है आप उदाहरण में ब्लूटूथ यूएसबी इत्यादि को ले सकते हैं
VAN (Virtual Area Network)
यह एक प्रकार का प्राइवेट नेटवर्क है जो किसी कंपनी के आंतरिक नेटवर्क से जोड़ने के लिए प्रयोग किया जाता है | इसका प्रयोग बहुत बड़ी कंपनियों तथा संगठन में अत्यधिक किया जाता है |Network Topology (नेटवर्क टोपोलॉजी)
किसी भी कंप्यूटर नेटवर्क में कंप्यूटरों को आपस में जोड़ने के तरीके को नेटवर्क टोपोलॉजी कहते हैं | किसी भी टोपोलॉजी में हर कंप्यूटर नोट या लिंक स्टेशन कहलाते हैंकुछ नेटवर्क टोपोलॉजी इस प्रकार से हैं
- Bus Topology (बस टोपोलोजी)
- Star Topology (स्टार टोपोलोजी)
- Ring Topology (रिंग टोपोलॉजी)
- Mesh Topology (मेश टोपोलोजी)
- Tree Topology (ट्री टोपोलॉजी)
1. Bus Topology (बस टोपोलोजी)
इसका प्रयोग उस स्थान पर किया जाता है जहां अधिक उच्च गति के कम्युनिकेशन चैनल की जरूरत पड़ती है जो एक सीमित क्षेत्र में हो लेकिन अगर कम्युनिकेशन चैनल खराब हो जाता है | तो पूरा नेटवर्क ही खराब हो जाता है इस नेटवर्क में लंबे केवल की जरूरत नहीं पड़ती है | इसमें किसी खराब हुए नोट को पता लगाना अत्यधिक कठिन भी होता है |
2. Star Topology (स्टार टोपोलोजी)
इसमें एक होस्ट कंप्यूटर की जरूरत पड़ती है | जिससे अन्य सभी लोकल कंप्यूटर को जोड़ा जाता है होस्ट कंप्यूटर को ही हब कहते हैं | यदि यह हब खराब हो जाए तो पूरा नेटवर्क खराब हो जाता है | लेकिन अगर कोई अन्य कंप्यूटर खराब हो हब को छोड़कर तो अन्य कंप्यूटर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है | इसमें किसी भी खराब हुए नोट का पता लगाना बहुत ही आसान होता है |
3. Ring Topology (रिंग टोपोलॉजी)
इस नेटवर्क टोपोलॉजी में प्रत्येक कंप्यूटर अपने पास के कंप्यूटर से गोलाकार आकृति में जुड़े रहते हैं | इस आकृति को सर्कुलर नेटवर्क भी कहते हैं | इस प्रकार के टोपोलॉजी में किसी भी लंबे केवल की जरूरत नहीं पड़ती है इसका प्रयोग ऑप्टिकल फाइबर में एक दिशा में डाटा के प्रभाव के लिए सर्वाधिक उपयुक्त होता है |
4. Mesh Topology (मेश टोपोलोजी)
इस नेटवर्क टोपोलॉजी में प्रत्येक कंप्यूटर एक दूसरे से सीधे जुड़े होते हैं जिसकी वजह से इसे पॉइंट टू पॉइंट नेटवर्क भी कहते हैं | इसमें डाटा के आदान-प्रदान का निर्णय प्रत्येक कंप्यूटर स्वयं ले सकते हैं यह अधिक दूरी के लिए ज्यादा अच्छे होते हैं | सबसे अच्छी बात इसमें यह होती है कि किसी एक कंप्यूटर के खराब होने पर अन्य कंप्यूटर का संचार प्रभावित नहीं होता है |
5. Tree Topology (ट्री टोपोलॉजी)
ट्री टोपोलॉजी इसमें सभी कंप्यूटर एक दूसरे कंप्यूटर से पेड़ की शाखों की तरह जुड़े होते हैं यह स्टार टोपोलॉजी का एक विस्तारित रूप है जिसमें आप नेटवर्क को अपनी इच्छा अनुसार आसानी से बढ़ा सकते हैं |
Internet access Technique (इंटरनेट एक्सेस टेक्निक)
Broad Band connection (ब्रॉडबैंड कनेक्शन)
इसका प्रयोग हाई स्पीड के नेटवर्क के लिए करते हैं जो टेलीफोन लाइनों द्वारा उपलब्ध कराया जाता है | इसमें कुछ तकनीकी का प्रयोग किया जाता है हाई स्पीड के लिए जैसे DSL (Digital Subscribe Line), Cable Modem, Fiber Optic, BPL (Brad Band Over Pour Line)
Dail UP Connection (डायलप कनेक्शन)
इसमें इंटरनेट से जुड़ने के लिए ISP का फोन नंबर डायल करना पड़ता है | तब आपका इंटरनेट चलेगा इस प्रक्रिया को होने में 10 सेकंड लगता है | इस कैटेगरी में कुछ ISP कंपनी आती है | जैसे Airtel, MTNL, Vodafone इत्यादि|
महत्वपूर्ण बिंदु:
सबसे अच्छी बात तो ए है कि ए सभी प्रश्न उत्तर कई बार पिछले महीने परीक्षा में किसी न किसी के पेपर में पूछे गये
तो फिर निचे दिए गये लिंक पर क्लिक करिये उसके बाद सभी प्रश्नों को अच्छे से देखिये |
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